शिवहर में छठी मैया एवं सूर्य देव को खरना का प्रसाद चढ़ाया गया, की गई पूजा-अर्चना

बिहार संपादक उत्कर्ष चौहान की रिपोर्ट 


शिवहर: महापर्व छठ के आज दूसरे दिन शिवहर में खरना पर्व बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया। खरना के दिन व्रती सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। आज छठ व्रतीयों ने खरना का प्रसाद छठी मैया को चढ़ाते हुए पूजा-अर्चना की। खरना का प्रसाद बहुत ही शुद्धता के साथ बनाया जाता है। इसे अक्सर मिट्टी के नए चूल्हे और आम की सूखी लकड़ी का इस्तेमाल करके पकाया जाता है। खरना का मुख्य प्रसाद गुड़ और चावल की खीर होती है, जिसे 'रसियाव' कहा जाता है। इसके साथ गेहूं के आटे से बनी रोटी या पूड़ी भी तैयार की जाती है। पूजा और भोग लगाते हुए शाम को सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा की गई और उन्हें खीर तथा रोटी का भोग लगाया गया। पूजा के बाद व्रती सबसे पहले खरना का प्रसाद ग्रहण करते हैं, इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भी इसे ग्रहण करते हैं। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो अगले दो दिनों तक चलता है। खरना केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन व्रती मन, वचन और कर्म से स्वयं को शुद्ध करते हैं ताकि उन्हें छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे गुड़ और चावल शरीर को अगले व्रत के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।

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